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एयर इंडिया के विनिवेश पर जल्द फैसले के संकेत दिये जेटली ने

एयर इंडिया के विनिवेश पर जल्द फैसले के संकेत दिये जेटली ने

नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकारी एविएशन कंपनी एयर इंडिया के प्राइवेटाइजेशन के संकेत दिए हैं। जेटली ने कहा कि इस बार में जल्द फैसला हो जाएगा। औपचारिक तौर पर दो पक्षों ने इस विमानन कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने की रुचि दिखाई है। जेटली की अगुवाई में मंत्रियों का एक समूह कर्ज के बोझ से दबी इस सरकारी एयरलाइन कंपनी के को किसी चुनिंदा कंपनी को बेचने के तौर तरीकों पर काम कर रहा है। एयर इंडिया काफी समय से घाटे में है सरकार की सहायता पर चल रही है।

एयर इंडिया की बिक्री प्रक्रिया को लेकर पूछे गए सवाल पर जेटली ने कहा कि ये फैसले तेजी से होने चाहिए, पर यह काम सामान्य ढंग से जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस साल जून में एयर इंडिया और उसकी पांच अनुषंगियों के रणनीतिक विनिवेश को सैद्धान्तिक मंजूरी दी है।

इससे पहले दिन में नागर विमानन सचिव आरएन चौबे ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘विमानन सेवा देने वाले बर्ड समूह ने सरकार को पत्र लिखकर एयर इंडिया की ग्राउंड हैंडलिंग सेवा एआईएटीएसएल के अधिग्रहण की इच्छा जताई है।’’ उन्होंने कहा कि इंडिगो के बाद अब बर्ड ग्रुप ने पत्र लिखकर एयर इंडिया में रुचि दिखाई है। एयर इंडिया करदाताओं के धन पर अपना परिचालन कायम रख पाई है और काफी समय से घाटे में चल रही है। एयरलाइन के पुनरोद्धार के कई प्रस्ताव आए हैं। नीति आयोग ने एयर इंडिया के पूर्ण निजीकरण का सुझाव दिया है। एयरलाइन पर कुल 52,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार द्वारा 2012 में दिए गए 30,000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज के बूत यह आज अपना परिचालन कर पा रही है।

 

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