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सस्ती दवाओं के लिए नए रूल्स जल्द, लेबल पर बड़े लेटर्स में देनी होगी जेनेरिक डिटेल

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सस्ती दवाओं के लिए नए रूल्स जल्द, लेबल पर बड़े लेटर्स में देनी होगी जेनेरिक डिटेल

नई दिल्ली।  केंद्र सरकार अच्‍छी क्‍वालिटी की दवाओं के दाम और कम करने की तैयारी में है। इसके लिए ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट में बदलाव कर लेबलिंग नॉर्म्‍स में बदलाव किया गया है। नए नॉर्म्स के मुताबिक, अब ड्रग मैन्युफैक्चरर्स (या कंपनियों) को लेबल पर दवा का जेनेरिक नाम बड़े लेटर्स में लिखना होगा, जबकि ब्रांड नाम छोटे लेटर्स में लिखना होगा। सूत्रों का कहना है कि इस बारे में सरकार ने ड्रॉफ्ट रूल तैयार कर लिया है जो इसी महीने जारी किया जा सकता है। 

- बता दें कि अभी एक ही साल्ट से बनी दवाओं (जेनेरिक ड्रग) को अलग-अलग ब्रांड नाम से सेल किया जाता है। एग्जाम्पल के तौर पर कंपनियां पैरासिटामॉल को सेरिडॉन, क्रोसिन, कैलपाल, पी-मॉल या अन्य कई ब्रांड नाम से सेल करती हैं। ऐसे में एक ही दवा अलग-अलग ब्रांड नाम से बिकती है। ब्रांड नाम से बिकने वाली दवाएं जेनेरिक दवाओं के मुकाबले कई गुना महंगी हो जाती हैं। जिसका असर सीधे कंज्यूमर्स की जेब पर पड़ता है।

कंज्यूमर्स के पास होगा ऑप्शन

- पैकेट पर जेनेरिक नाम लिखे जाने से कंज्यूमर्स के पास यह ऑप्शन होगा कि वह कौन-सी दवा लेता है। वहीं, सरकार इस तैयारी में भी है कि डॉक्टरों के लिए दवा की पर्ची पर जेनेरिक दवा का नाम लिखना जरूरी कर दिया जाए।

- बता दें कि सरकार देश में अच्छी क्वालिटी वाली जेनेरिक दवाओं की पहुंच बढ़ाना चाहती है। बजट में भी इसका एलान किया गया था। कहा गया था कि सरकार यह तय करेगी कि जहां अफोर्डेबल कीमतों पर जेनेरिक दवाओं की अवेलिबिलिटी बढ़े,  वहीं इनका यूज भी बढ़ाया जाए। 

नाम को लेकर क्या है परेशानी?

- अभी कई दवा कंपनियां या रिटेलर्स दवा का ब्रांड नाम लिखने के बदले में डॉक्टरों को कमीशन देते हैं। जिसके बदले डॉक्टर जेनेरिक नाम की बजाए ब्रांड नाम से दवा लिखते हैं। ये दवाएं महंगी होती हैं, इसलिए कंज्यूमर्स की जेब कटती है।

 

एमसीआई को भी मिली जिम्मेदारी

- सूत्रों के अनुसार, डॉक्टरों के लिए भी जेनेरिक दवाओं का नाम लिखना जरूरी होगा। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) को तय करना होगा कि वह सभी डॉक्टरों के लिए नोटिफिकेशन जारी करे कि वे जेनेरिक दवाएं लिखें। अभी ज्यादातर डॉक्टर अपने मरीजों को ब्रांडेड नाम से दवा लिखते हैं। सरकार का मकसद है कि जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा देकर इलाज पर आने वाली कॉस्ट कम की जाए।  

 

डॉक्टरों के गिफ्ट पर भी रोक

- इसी को देखते हुए सरकार डॉक्टरों-दवा कंपनियों और रिटेलर्स के नेक्सस को खत्म करने के लिए डॉक्टरों को दिए जाने वाले गिफ्ट पर भी रोक लगा रही है। गिफ्ट की मैक्सिमम लिमिट 1000 रुपए की जा सकती है।

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