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गेहूं 24 तो चावल की लागत पहुंची 32 रुपए, राशन में बिकता है 2-3 रुपए किलो

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गेहूं 24 तो चावल की लागत पहुंची 32 रुपए, राशन में बिकता है 2-3 रुपए किलो
 
नई दिल्ली: लागत में कटौती की सरकारी एजेंसियों की कोशिशों के बावजूद राशन के जरिए दो रुपए किलो बिकने वाले गेहूं और तीन रुपए किलो बिकने वाले चावल की आर्थिक लागत पिछले 5 साल के दौरान क्रमश: 26 प्रतिशत और लगभग 25 प्रतिशत वृद्धि के साथ 24 रुपए और 32 रुपए किलो तक पहुंच गयी है। भारतीय खाद्य निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।
 
उन्होंने बताया कि 2017-18 में गेहूं की आर्थिक लागत 2408.67 रुपये प्रति क्विंटल (24.09 रुपए किलो) जबकि चावल की 3264.23 रुपए क्विंटल (32.6 रुपए किलो) रहने का अनुमान है। अधिकारी ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य, मजदूरी और अन्य लागतें बढ़ने से आर्थिक लागत बढ़ी है।
 
वर्ष 2013-14 में गेहूं की प्रति क्विंटल लागत जहां 1908.32 रुपए यानी 19 रुपए किलो से कुछ अधिक थी, वहीं 2017-18 तक यह बढ़कर 2408.67 रुपए क्विंटल यानी 24.09 रुपए किलो हो गई। वहीं चावल की लागत 2013-14 में 2615.51 रुपए प्रति क्विंटल (26.15 रुपए किलो) से बढ़कर 2017-18 में 3264.23 रुपए क्विंटल (32.6 रुपए किलो) हो गई। इस लिहाज से गेहूं की खरीद और उसके रखरखाव पर आने वाली लागत जहां प्रति क्विंटल 26.22 प्रतिशत बढ़ी वहीं चावल की लागत में इस दौरान 24.80 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
 
किसानों से अनाज की खरीद करने से लेकर उसे बोरियों में भरकर गोदामों तक पहुंचाने और उसका रखरखाव करने वाले सार्वजनिक उपक्रम भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को इस समय गेहूं पर 24 रुपए और चावल पर 32 रुपए किलो की लागत पड़ रही है जबकि राशन में इन अनाज को क्रमश: 2 रुपए, 3 रुपए किलो पर उपलब्ध कराया जाता है। आर्थिक लागत और बिक्री मूल्य में अंतर की भरपाई सरकार सब्सिडी के जरिए करती है।
 
यह पूछे जाने पर कि लागत में कमी के लिये क्या कुछ कदम उठाये गये हैं, एफसीआई अधिकारी ने कहा, हमने कार्यबल को युक्तिसंगत बनाकर तथा कुछ अन्य अनावश्यक खर्चों को कम कर पिछले कुछ साल में 800 करोड़ रुपए की बचत की है। उन्होंने कहा, लेकिन एमएसपी, ब्याज और कर्मचारियों के वेतन आदि पर होने वाला खर्चा ऐसा है जहां हमारा कोई नियंत्रण नहीं है। हां, प्रशासनिक लागत है जहां कुछ किया जा सकता है जिसे हमने कुछ हद तक युक्तिसंगत बनाया है।
 
उल्लेखनीय है कि फसल वर्ष 2012-13 में धान (सामान्य) का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1250 रुपये प्रति क्विंटल था जो 2016-17 में बढ़कर 1470 रुपए हो गया। इसी प्रकार, गेहूं का एमएसपी इस दौरान 1350 रुपष से बढ़कर 1625 रपये प्रति क्विंटल हो गया। अधिकारी ने कहा, हमने अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों के मामले में चीजों को युक्तिसंगत बनाया है लेकिन इसकी भी सीमा है. अगर आप ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों को कम पैसा देंगे, तो फिर गलत काम को बढ़ावा मिलेगा. इसलिए मजदूरी में वृद्धि भी महंगाई के हिसाब से जरूरी है।
 
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