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धोनी खेलेंगे अपना आखिरी विश्व कप, क्या खिताब के साथ होगी विदाई

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 धोनी खेलेंगे अपना आखिरी विश्व कप, क्या खिताब के साथ होगी विदाई
 
नई दिल्ली। World Cup 2019 भारतीय टीम का आगामी विश्व कप में प्रदर्शन चाहे जैसा रहे, लेकिन एक बात तय है कि यह विश्व कप विजेता पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (Dhoni) का अंतिम वनडे विश्व कप होगा। भारतीय टीम के नंबर एक विकेटकीपर धौनी विश्व कप में पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरेंगे। जरूरत पड़ने पर वह चौथे नंबर पर भी उतर सकते हैं। भारतीय कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) भी धोनी के बिना खुद को मैदान पर अधूरा महसूस करते हैं। टीम के युवा खिलाड़ी धोनी को अपना आदर्श और मार्गदर्शक मानते हैं। ऐसे में ना सिर्फ धोनी चाहेंगे कि वह अपने अंतिम विश्व कप में टीम को खिताब दिलाएं, बल्कि भारतीय टीम भी चाहेगी कि वह अपने इस पूर्व कप्तान का अंतिम विश्व कप यादगार बनाए। वैसे धोनी विश्व कप के बाद भी क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे या इस खेल को अलविदा कह देंगे इसके बारे में तो पता नहीं है, लेकिन अगर खिताब के साथ आखिरी विश्व कप में उनकी विदाई हो तो इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है। 
 
दिग्गज कप्तान : 2007 में टी-20 विश्व कप हो या 2011 का वनडे विश्व कप या फिर 2013 की चैंपियंस ट्रॉफी, आइसीसी के इन तीनों ही टूर्नामेंटों में जो सबसे बड़ी समानता थी, वो थी धोनी की कप्तानी में भारत का खिताब जीतना। क्रिकेट के मैदान में ऐसी सफलता तो बड़े से बड़े दिग्गज कप्तानों को भी नसीब नहीं हुई। एक बार फिर धोनी अब इंग्लैंड में होने वाले विश्व कप के लिए अपनी कमर कस चुके हैं। धोनी का यह चौथा वनडे विश्व कप होगा। उन्होंने 2007 का अपना पहला विश्व कप राहुल द्रविड़ की कप्तानी में खेला था। 2011 और 2015 के विश्व कप में वह कप्तान थे। इस बार वह कप्तान नहीं हैं और ऐसे में उनके पास अपने अंतिम विश्व कप का पूरा लुत्फ उठाने का मौका है।
 इस आइपीएल में उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से सबको चुप कर दिया है। उन्होंने विकेट के आगे और पीछे दोनों जगह कमाल का प्रदर्शन किया। उन्होंने टूर्नामेंट में 83.20 के सर्वश्रेष्ठ औसत और 134.62 के स्ट्राइक रेट से 416 रन बनाए। उनके बाद टूर्नामेंट का दूसरा सर्वश्रेष्ठ औसत डेविड वार्नर (69.20) का रहा। विकेट के पीछे भी उन्होंने 16 शिकार बनाए, जिनमें 11 कैच और पांच स्टंप रहे। विश्व कप से ठीक पहले उनकी इस तरह फॉर्म में वापसी विरोधी टीमों के लिए खतरे की घंटी है। वैसे भी धौनी की असली पहचान तो फिनिशर की है और वह एक बार फिर चाहेंगे कि भारतीय टीम को मैच जिताकर ही पवेलियन लौटें।
 
 ऐसा नहीं है कि धोनी की फॉर्म में वापसी आइपीएल के जरिये हुई। साल 2018 उनके लिए बतौर बल्लेबाज जरूर खराब रहा, लेकिन इस साल का आगाज उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में तीन अर्धशतक जड़कर किया था। इनमें से दो में तो वह नाबाद लौटे थे। इसके बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ उसकी सरजमीं पर और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज में भी उन्होंने अपने बल्ले का जलवा दिखाया था।
 
धोनी मानसिक रूप से काफी मजबूत हैं और दवाब में भी मैदान पर अक्सर शांत नजर आते हैं। कप्तान नहीं होने के बावजूद उनके दिमाग में हमेशा रणनीति बनती रहती हैं या यह कहा जाए कि वह एक साथ प्लान-ए, बी और सी बनाते हैं और उन पर एक साथ काम भी करते हैं। इसका कोहली को फायदा मिलता है। धौनी की वैसे कोई बड़ी कमजोरी नहीं है, लेकिन हाल के वर्षो में देखा गया है कि वह कई बार काफी धीमा खेलते हैं और गेंदबाज को खुद पर हावी होने का मौका दे देते हैं और अपना विकेट गंवा देते हैं। विश्व कप में धौनी को इससे बचना होगा।
 
वैसे भारतीय टीम की सबसे बड़ी समस्या नंबर चार बल्लेबाज की है, लेकिन धौनी यहां भी कोहली के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकते हैं। धौनी ने 30 पारियों में नंबर चार पर बल्लेबाजी की है और एक शतक व 12 अर्धशतक की मदद से 1358 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट भी 92.92 का रहा। इतना ही नहीं, 2015 विश्व कप के बाद भी धौनी ने नंबर चार पर 12 पारियां खेली हैं, जिनमें 40.72 की औसत और 76.84 के स्ट्राइक रेट से 448 रन बनाए। 2015 विश्व कप के बाद नंबर चार पर उनसे ज्यादा रन सिर्फ अंबाती रायुडू ही बना सके थे। इसलिए इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि जरूरत पड़ने पर धौनी नंबर चार पर भी बल्लेबाजी करने उतर सकते हैं।
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