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हार्दिंक, जिग्नेश और अल्पेशः गुजरात के तीनों युवा चेहरे आखिर कहां हैं

हार्दिंक, जिग्नेश और अल्पेशः गुजरात के तीनों युवा चेहरे आखिर कहां हैं
 
अहमदाबाद । गुजरात में 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन का कारण काफी हद तक प्रदेश के युवा नेताओं हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश ठाकोर की तिकड़ी का हाथ माना जाता है। अपनी-अपनी जातियों में गहरी पैठ के कारण इन युवा नेताओं से कांग्रेस को सूबे में भाजपा के मुकाबले मजबूती से खड़ा होने में मदद मिली थी, लेकिन अब जबकि 18 महीने बाद लोकसभा चुनाव हो रहा है, स्थितियां बदल गई हैं।
 
जहां ठाकोर सेना से जुड़े अल्पेश ठाकोर ने कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया है। उधर, सुप्रीम कोर्ट द्वारा मेहसाणा दंगा केस में मिली सजा पर रोक लगाने संबंधी याचिका के खारिज करने के बाद हार्दिक पटेल इस बार का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। वह अन्‍य राज्‍यों में कांग्रेस का प्रचार कर रहे हैं। वहीं वड़गाम के विधायक जिग्नेश मेवाणी अब राष्ट्रीय राजनीति में खुद को उभारने की महत्वाकांक्षा में जुट गए हैं।
 
पाटीदार आंदोलन के कारण चमके हार्दिक पटेल 
पाटीदार आंदोलन ने 26 वर्षीय हार्दिक पटेल को अचानक गुजरात की राजनीति में एक बड़ा नाम बना दिया था। प्रदेश की कुल जनसंख्‍या में करीब 12 फीसदी आबादी पाटीदार समाज की है। पाटीदार समाज के लिए आरक्षण की मांग को लेकर हार्दिक पटेल के आंदोलनों ने यहां उन्हें मजबूत युवा नेता के रूप में पहचान दिलाई। हाल में हार्दिक पटेल कांग्रेस में शामिल हो गए और गुजरात में पार्टी के लिए प्रचार भी शुरू किया।
 
शराब के खिलाफ आंदोलन से अल्पेश ठाकोर की मिली पहचान 
हार्दिक पटेल जब पाटीदार आंदोलन के जरिए इस समाज के नेता के युवा नेता के रूप में उभरे थे, ठीक उसी समय पिछड़ा वर्ग की मांगों को लेकर सड़क पर उतरे अल्पेश ठाकोर भी चर्चित हुए थे। अल्पेश ने ठाकोर सेना बनाकर शराबबंदी के बावजूद गुजरात में अरबों रुपये के शराब कारोबार के खिलाफ मजबूत अभियान चलाया था। इस अभियान ने अल्‍पेश ठाकोर को गुजरात में चर्चित नेता बना दिया था। इसके बाद अल्पेश कांग्रेस में शामिल हो गए और 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जीत भी दर्ज की। पर, अब अल्पेश कांग्रेस का साथ छोड़ चुके हैं। हालांकि उनका कहना है कि वह समाज के लिए काम करते रहेंगे।
 
ऊना कांड से उभरे थे जिग्‍नेश मेवाणी 
उधर, ऊना दलित कांड के खिलाफ लंबे संघर्ष के कारण जिग्नेश मेवाणी गुजरात में एक युवा दलित नेता के रूप में उभरे। बता दें कि ऊना में मरी गाय की खाल निकालने पर चार दलितों की बेरहमी से पिटाई की गई थी। इस मामले को लेकर जिग्नेश मेवाणी ने लंबा आंदोलन चलाया था।
 
बेगूसराय में प्रचार के लिए पहुंचे हैं जिग्नेश 
2017 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने वडगाम सीट उन्हें ऑफर किया, हालांकि वह इस सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीते। पिछले साल से जिग्नेश राष्ट्रीय स्तर पर दलित नेता बनने की महत्वाकांक्षा को लेकर ज्यादा सक्रिय हैं। यही वजह है कि वह अलग-अलग राज्यों में जाकर वहां अपने मुद्दों को उठा रहे हैं। हाल में जिग्नेश ने बिहार के बेगूसराय में जेएनयू के नेता कन्हैया कुमार के लिए प्रचार किया है। 
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